Sunday, 6 June 2021

गुमशुदगी

अपने आवाज की तर्जपोशी में समंदर गुम है
अपने रफ्तार की गर्मजोशी में
तूफां गुम है 
अपने बहारों की हुस्नपरस्ती में
गुलिस्ताँ गुम है
अपने चेहरे की मासूमियत में
मेरा महबूब गुमहै 
दिल में उभरती हुआ दरार में
मेरी आशकीयत गुम है।
कवि 'रवि'

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