अक्ल की शक्ल
किसी ने मुझसे पूछा बताओ तो
अक्ल की शक्ल कैसी होती है
मैंने कहा भाई व्यक्ति और स्थिति सापेक्ष होती है
वो बोला फिर अक्ल बड़ी या भैंस
क्यों कहा जाता है
मैंने कहा भाई अक्ल का
मापदंड नहीं होता है
किंतु उसकी तृषा शांत नहीं हुई
वो फिर बोला
अक्ल और दिमाग में
कौन बेहतर कहलाता है
मैंने कहा भाई
ये मनुष्य स्वभाव के दो धृव है
जाने अनजाने भी लेकिन
कभी एक ना हुए
कभी अक्ल कुछ कहती
तो दिमाग कुछ कहता है
दोनों की राय एक रही
ऐसा बहुत कम होता है
दिलो दिमाग के मेल पर
अक्ल अक्सर ख़फ़ा होती है
इन सब के फेर में उलझा
मनुष्य गोते ही खाता है
सुनकर मेरी वाणी से
उसपर परिणाम कुछ ऐसा हुआ
अक्ल और शक्ल की अनबुझ पहेली को छोड
वो चलता हुआ
कवि 'रवि'

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