दोस्त दिल की धड़कन होते हैं
चलती चक्की से बेजार हो कर मन थम सा जाता है
फिर से उम्मीद जगाने को सिर्फ दोस्त काम आता है
आनंद का आशियाना बना दिल में बसता है
दुःख को अपना बना हमदर्दी बढा लेता है
किसी उलझन में ना आवाज लगानी पडती हो जिसे
वो और कोई नहीं बस अपना दोस्त होता है
चाहे रूठे सारी दुनिया चाहे ठुकरा दे ज़माना
भगवान से भी झगड़ने को तैयार वो दोस्त होता है
कैसे बयां करूं वो महफ़िल ए इशरत 'रवि'
बिना बोले ही समां बांधें वो दोस्त होता है।
कवि 'रवि'

0 Comments:
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home