ख्वाहिश
मेरे गरेबाँ से खेले
मेरे अरमानों से खेले
मेरे जजबातों से खेले
तो भी कम हुआ।
मेरे दिल से खेले
मेरी वफाओं से खेले
मेरी उल्फत से खेले
तो भी कम हुआ।
मेरी कब्र पर नाचो
मुझे बेनिशाँ बनाओं
मेरी अबादत को मिटाओ
तो ही में समझूंगा
मेरी आशक़ीसे
मेरी आरजूओं से
मेरी हर बात से तुमको
वाकई नफ़रत है।
कवि 'रवि'

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