Saturday, 1 August 2026

ना देखो ख्वाब तुम इतने

ना देखो ख्वाब तुम इतने 
कि संजोए भी जाएं ना 
ख़फ़ा गर होगी किस्मत तो 
एक क़तरा भी पाएं ना 
हवाला फिर भी दिल देता 
तसल्ली रख सुबह होगी 
बची ना है उमर अब तो 
सहारा कोई पाएं ना 
दीवानों की हकीकत क्या 
खयालों के फसाने है 
रही उम्मीद पल दर पल 
नज़र पर कोई आएं ना 
अकीदत की इंतहा 'रवि'
सवालों में यूं उलझी है 
रू ब रू है वो क़ासिद पर 
जिस्म से रूह जाएं ना 
कवि 'रवि' 

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