तमन्ना
हम तो डुबे हुआ है
अपने ही अश्कों में
हमें देखकर आपने क्यों
अपना मूंह छिपा लिया ।
ग़म तो हमने खरीदा है
अपना दिल बेचकर
आप क्यों ग़मगीन हो
इस तरह हमें देखकर
हम तो मर जायेंगे
बेवफ़ाई का क़फन ओढ़े
तुम मुस्कराती रहो सदा
मेरी मज़हार देखकर।
कवि 'रवि'

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