एक सवाल
कभी यूं ही सोचता रहता हूं कि पहले गम एजाद हुआ या पहले खुशी
सवालों का अंबार उभर आता है पर जवाब नहीं मिलता है कभी
उम्र के इस पड़ाव तक पहुंचते पहुंचते
जमीन पर जीने वाला हर इंसान
इस उधेड़बुन का शिकार रहता है
कि क्या सही और क्या ग़लत
बस वक्त होता है और कुछ भी नहीं अलबत
मैं जब तनहा रहता हूं तो इश़रते महफ़िल को याद करता हूं,
और जब बज़्मे महफ़िल में होता हूं तो उदास रहता हूं
वो यार भी कितने बेवफा निकले जो इक पल भी न जुदा हुए,
नादान था मैं या के फिर वे सभी जो अचानक फनां हुए
आह तेरी इक बार की बददुआ है कितनी असरदार,
दिल से निकली और सीधे जिंदगी को तबाह कर गयी
अपने किये कराए पै अब कैसा पछतावा 'रवि'
वो वक्त जो बीत गया फिर न आया है कभी
कवि 'रवि'

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