Sunday, 8 January 2023

एक सवाल

कभी यूं ही सोचता रहता हूं कि पहले गम एजाद हुआ या पहले खुशी
सवालों का अंबार उभर आता है पर जवाब नहीं मिलता है कभी 
उम्र के इस पड़ाव तक पहुंचते पहुंचते  
जमीन पर जीने वाला हर इंसान 
इस उधेड़बुन का शिकार रहता है 
कि क्या सही और क्या ग़लत
बस वक्त होता है और कुछ भी नहीं अलबत 
मैं जब तनहा रहता हूं तो इश़रते महफ़िल को याद करता हूं, 
और जब बज़्मे महफ़िल में होता हूं तो उदास रहता हूं
वो यार भी कितने बेवफा निकले जो इक पल भी न जुदा हुए, 
नादान था मैं या के फिर वे सभी जो अचानक फनां हुए
आह तेरी इक बार की बददुआ है कितनी असरदार,
 दिल से निकली और सीधे जिंदगी को तबाह कर गयी
अपने किये कराए पै अब कैसा पछतावा 'रवि'
वो वक्त जो बीत गया फिर न आया है कभी
कवि 'रवि'

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