मिसाल
ये क्या मिसाल है के बदस्तूर वो पेश आते हैं
जज्बों के तूफान की मानिंद बेशतर पेश आते हैं
आबोहवा इस शहर की मर्ज दे रही है हमें
ना दवा ना इलाज वो अहले खंजर पेश आते हैं
यूं आशना हुए के दिलो जान लुटा बैठे
गुमाॅं होता है वो लुटेरे बेहतर पेश आते हैं
फिज़ा की फितरत क्यों कर भा गई है हमें
जिनपे गुलिस्तां लुटाए वे नश़्तर पेश आते हैं
तुम वो साहिल हो 'रवि' जिसका दर्या भी गाफिल है
दुआएं भी न दे पाएं इतने कमतर वो पेश आते हैं
कवि 'रवि'

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