Thursday, 21 November 2024

हद बे हद

मत पूछो किस क़दर इंतजार की हद कर ली 
थी जो मुकर्रर हमने मौत भी मुल्तवी कर ली 
आंखों का नूर लम्हा दर लम्हा फ़ना होता गया 
होश उड़ने लगे फिर भी नब्ज़ काबू कर ली 
हुई महसूस आहट जब उनके कदमों की 
यक ब यक जेहन में जिंदगी भर ली 
हुए दीदार जैसे ही.....उजाला सा हुआ 
फिर न उलझेंगे आशनाई से....तौबा कर ली 
'रवि' क्योंकर ज़माने में चर्चे आम हुए 
रही बदनाम उल्फत तो क्यों सभी ने कर ली 
कवि 'रवि' 

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