Friday, 20 December 2024

चंद अशयारों में

चंद अशयारों में जिंदगी 
सिमट कर रह गई यारों 
जो कहानी जुबां कह न सकी 
कलम कह गई यारों 
नाकामयाबी को गले लगा कर 
चूप रहते थे मगर 
दर्दे आशनाई को 
दुनिया समझ गई यारों 
अफसाना उल्फत कभी 
रंगीन रहा होगा शायद 
दिल की चोटें ही मेरी 
दवा बन गई यारों 
है आसमां वाला तो 
कभी तजुर्बा करा दें मुझे 
आबाद हकीकतें तखल्लुस में 
जब्त पड़ गई यारों 
बेगैरत है ज़माना तो इल्ज़ाम किसको दें 
'रवि' की नज़्म भी 
'कालीख ए शब' में खो गई यारों 
कवि 'रवि'

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