अनसुलझे प्रश्न
नजरों के उस पार
कहते हैं
है और जीव सृष्टी
मेहमान बनकर
क्या कोई गया भी है ?
विचारों की धारा
सतत प्रवाही है !
उगम की खोज
किसीने की भी है ?
अस्थियों का देह
सभी संजोते हैं !
आत्मा की चाह
कभी पूरी की भी है ?
निर्मलता की अभिलाषा
सभी को है
निर्मलता का पास निर्मलता से
कभी किया भी है
कवि'रवि'

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