दिल और वो
हुस्न की उसके याद आयी
तो धड़कन बढ़ती गयी
हूर जब सामने आयी
धडकते धडकते रह गई
मुडकर चलने लगी तो
दिल कदमों पे जा गिरा
घूमकर खड़ी हुई तो
दिल ने हंसने को नकारा
इस कश्म कश में के
मेरी जुबाँ से कुछ निकले
उसने पलकें उठाई
तो ज़ेहन जोरसे सिहरा
जब उसने देखा,
यह कुछ कहने से रहा
तो मुझे आँखोंसे पुकारा
दिल जो कदमों में था
हाथों में जा गिरा
जिस्म ने मेरे लेकीन वक्त पे मुझे मारा
जवाब न पानेपर जब,
उठकर जाने लगी
मेरी धडकन वापीस,
मेरे साथ होने लगीं
दहलीज पर पहुंची तो
मेरी जुबां तेज हुई
क्या बताऊं बात सनसनीखेज हुई
न मैंने कुछ कहा ना उसने कुछ सुना
मन ही मन लेकिन
उसने मुझे ही चुना
आज हमारी मोहब्बत एक मिसाल है शाहजहाँ का जैसे कोई ताजमहल है
कवि'रवि'

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