Friday, 1 October 2021

स्विकृती और विकृति

जय श्री राम मित्रों 🙏
आज अर्थात २ अक्टूबर एक ऐसा दिवस हैं जिन्हें हम अपने स्मृति पटल से कभी हटा नहीं सकते। जी हां यह कटु है लेकिन सत्य है कि इतिहास में आज ही के दिन इस भूमि पर स्विकृती और विकृति दोनों का जन्म हुआ था। एक वो था जो कभी इस देश में रहने की कल्पना भी नहीं करता था और अंग्रेजी चकाचौंध का दीवाना था, ऐयाशी जिसके जीने का मुख्य कारण था। लिहाज़ा उसने विदेश यानी कि दक्षिण अफ्रीका में ही अपना वास्तव्य बनाने में भलाई समझी। २१वर्ष वहां बिताने के पश्चात् जब उसे भूरी चमड़ी वालों ने लताड़ा तब अक्ल आई कि अपना देश बहुत सुंदर है। दुर्दैव से हम इतने भोले हैं कि इस बगुला भगत को पहचान नहीं पाए और आज न चाहते हुए भी उसका भूत हमारे सर पर हावी है।
मित्रों, दुसरा व्यक्तित्व वो है जो सशक्त भारत की कामना लिए राजनीति को सेवावृत्ति बनाकर जीवन जीने का आदर्श स्थापित करना चाहता था। "जय जवान जय किसान" जैसा देश हित को जगाने वाला नारा देकर जिसने अल्प समय में देश के हर नागरिक की स्वीकृति हासिल की थी। जिसके कहने पर देशवासियों ने सप्ताह में एक दिवस का उपवास तक अपना लिया था।
संक्षिप्त में यही कहना चाहूंगा कि हमें आज का दिवस आदरणीय दिवंगत प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी को स्मरण कर मनाना चाहिए न कि ढोंगी पाखंडी अधर्मी गांधी को।
आप सभी स्नेहीजनों की राय मुझसे सहमति की होगी इस बात पर मुझे कोई शंका नहीं।
आइए भारत को महान बनाने के लिए आवश्यक पहल करते हुए सच्चा इतिहास लिखें और नयी पीढ़ी को सही दिशा दिखाएं।
कवि'रवि'

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