ये मेरा देश है ऐसा
सहस्त्रों वर्षों का इतिहास लिये
हमारी संस्कृति अविरल धारा के मानिंद बढ़ती आयी है
राक्षसों का निर्दालन करने यहां देवों ने अवतार लिये
तत्वों को सोपान बना कर अनेकों सम्राट हुए
आज परंतु दुष्टों की
देखो यहां भरमार हुई
जनता को भरमाने हेतु
रेवड़ियों की बौछार हुई
कोई जाता जेल ये कहकर
मैं तो हितकारी हूं
रोज़ बांटता ढेरों व्यंजन
जनता का कैवारी हूं
स्वार्थ मात्र के लिए बेच दूं आप स्वयं को
ना हिचकूं मैं
नीलामी पर लाने देश को
कोई गुंडा चिल्लाता है
मुझपर है अन्याय हुआ
धमकाए भी न्यायालय को
यह तो अत्याचार हुआ
रामप्रभू अब आसिन है
वे ही सच्चा न्याय करें
अनिष्ट सारा समाप्त कर के
सत्य कृति का उद्धार करें
कवि 'रवि'

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