Friday, 19 September 2025

सिलसिला ऐ वक्त

उम्र गुजर जाती है मगर 
यादों का सिलसिला 
बरकरार रहता है 
बिते हुए लम्हों को 
बार-बार जीने को 
दिल बेकरार रहता है 
राहें भटक जाती है, 
किरदार बदल जाते हैं 
सबकुछ धुंधला जाता है 
लेकिन 
इंतजार बेशुमार रहता है
कवि 'रवि'

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