Thursday, 7 August 2025

दोस्ती के नाम एक मुक्तसर सी नज़्म


दोस्ती के नाम एक मुक्तसर सी नज़्म 
दोस्त जज्बों की कद्र करने वाले होते हैं 
हर उम्र में हौसला बढ़ाने वाले होते हैं 
एक बार की दोस्ती 
ताउम्र बरकरार रहती है 
तकरार कभी कभार हो भी जाए अगर 
माफी के लिए हकदार होती है 
दोस्तों की रुसवाई जिसपे गुज़रती है 
उसकी दुनिया बहुत बेकार होती है 
कवि 'रवि'

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