दोस्ती के नाम एक मुक्तसर सी नज़्म
दोस्ती के नाम एक मुक्तसर सी नज़्म
दोस्त जज्बों की कद्र करने वाले होते हैं
हर उम्र में हौसला बढ़ाने वाले होते हैं
एक बार की दोस्ती
ताउम्र बरकरार रहती है
तकरार कभी कभार हो भी जाए अगर
माफी के लिए हकदार होती है
दोस्तों की रुसवाई जिसपे गुज़रती है
उसकी दुनिया बहुत बेकार होती है
कवि 'रवि'

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