दुआ मांगता है अरे किस जहां से
दुआ मांगता है अरे किस जहां से
कोई खुश ना गुज़रा अभी तक यहां से
है तेरी मुहब्बत यहां जिस किसी से
आएंगे जलाकर तुझे बेरुखी से
ना दौलत बनी है वफादार तुझसे
ना दरकार किसको तेरे आशियां से
कहानी वजूद की रह जाएगी पीछे
खोई जब दुनिया फिर पाएगा कहां से
'रवि' और अब कुछ ना हासिल की चाहत
करें अलविदा और हो रुखसत यहां से
कवि 'रवि'
