Saturday, 8 August 2026

इत्तेफ़ाक न था

मेरा मंजिल की तरफ जाना इत्तेफाक न था 
जाम ओ महफ़िल को ठुकराना इत्तेफाक न था 
इल्ज़ाम ए बेवफाई साकी का सहकर भी 
सरेराह कांटों पे चलना महज़ इत्तेफ़ाक न था 
एक अर्सा लगा है इस मरहले को सुलझाने 
छालों पर मरहम ना लगाना इत्तेफ़ाक न था 
आरजूओं तमन्नाओं का दौर गैर लाज़मी है अब 
इरादों का इस कदर सख़्त होना इत्तेफ़ाक न था 
'रवि' आंधी तूफ़ान फितरतें मूंह मोड़ चुकी तुझसे 
तेरा संग से सख्त हो जाना इत्तेफाक न था 
कवि 'रवि'

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