Sunday, 6 June 2021

याद

सुबह न आई,शाम न आई
एक पल ऐसा नहीं। 
जो उनकी याद न आई
रात न आई, दिन न आया
कोई समां ऐसा नहीं
उनकी यादों का एहसास नही लाया।
सुबह की सर्द हवा 
उनके यादों की नमीं लायी
शाम के उमडते बादल
उनके आगोश की कमी लाये । 
दोपहर की धूपसा
चमकता उनका चेहरा
याद आया खयालों में 
पेशे नजर नही आया ।
कवि'रवि'

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home