जन्नत
ताजिन्दगी
जिनके दीदार को तरसे हम
आज मिले भी तो...... मेरे जनाजे पर
शुक्रगुजार हूँ ऐ राजे धड़कन
मज़हार की मिट्टी तो.....सुहानी हो गयी
तुझसे न शिकवा कोई
न गिला न अफसोस
तड़पना मेरी हयात थी
ख़्वाब ही थी अबादत
जन्नते मैकश....मैकदा हो शायद
मेरी जन्नत तेरे दीदार है साकी
कवि'रवि'

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