Thursday, 10 June 2021

अनुभव

उस दिन जब यह सोचा
क्या पहाड़ों की धड़कन होती है?
गूँजती हवा ने यह समझाया 
कि मुझमें भी जज़बात है
राह चलते पगडंडी पर 
कदम रखते जब सोचा 
पूछा क्यों हो इतनी टेढी और मुश्किल
जवाब पाया 
जिंदगी का तजुर्बा कराने के लिए
सुबह शबनम देख घास पर
अचानक खुश हुआ
उसने समझाया 
तकलिफों में भी चंद पल
होते हैं मेरी तरह
रात में कालीख से डरकर
जब दिया जलाने को मन हुआ
तो यह सुना 
खोज करो उसे उजाले की 
जो जीवन को ही रोशन कर दें
कवि'रवि'

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