संघ को प्रणाम
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संघ को प्रणाम
मित्रों,
हाल के समय में देश में राजनीतिक दृष्टि से बडी उथल-पुथल चल रही है। देखें तो वाकये छोटे छोटे है किंतु, उनके परिणाम त्सुनामी की तरह विद्यमान विपक्षी इकाइयों को झटके पर झटके देने में सक्षम बने हुए हैं।
जी २० सम्मेलन के आयोजन का औचित्य साध कर महामहिम राष्ट्रपति जी के कार्यालय ने अपने निमंत्रण पत्र में राष्ट्रपति जी का उल्लेख "president of Bharat" ऐसा किया। बात इतनी सी है परंतु, सदियों से अंग्रेजों का अनुनय करने वाले कांग्रेस पार्टी तथा उसका लांगूल चालन करने वाले अन्य विरोधी दल इतने बौखला गए की उन्होंने उग्र विरोध करना प्रारंभ किया।
आइये समझते हैं इन गतिविधियों का मूल उद्देश्य क्या है, इसकी समय सापेक्षता कैसी है और इसका विश्व को क्या संदेश देने में फायदा हुआ है।
भाजपा के आय टी सेल की तरफ से विरोधियों के हर एक पहल का विश्लेषण तथा अभ्यास दैनंदिन तरीके से किया जाता है और उनकी कोई भी चाल को विफल बनाने के लिए तत्परता से विकल्प खोज लिये जाते हैं। मुझे तो दृढ संदेह है कि, विरोधी दलों की ओर से उनकी आगामी गतिविधियों का समाचार पहले ही भाजपाइयों को पहुंचा दिया जाता है, ये कौन जासूस छुपे हुए है पता नहीं लेकिन है बड़े माहिर। इतने चुपचाप संदेश निर्गमन करते हैं कि विरोधियों के सूरमा हर बार चित पट हो जाते हैं। "आय. एन. डी. आय. ए" नामक विरोधी दलों का नया संगठन अस्तित्व में आया बड़े हर्षोल्लास से। सोचने लगे कि अब तो मोदीजी को पछाड़ दिया है और २०२४ के चुनावों में जीत एकदम आसान हो गई है। मैं समझता हूं इससे बड़ी मूर्खता तो इतिहास में किसी भी मूर्ख के नाम पर दर्ज नहीं है। सीधी सी बात है इस देश में भारत को इंडिया संबोधने वाले तथा कथित सुशिक्षित संख्या में मुश्किल से १०% होंगे। बाकी बहुतांश जनता या तो भारत कहती हैं या फिर हिंदुस्तान कहती हैं।
इस १० प्रतिशत सुशिक्षित लोगों का चुनाव में कितना योगदान रहता है इसका विदारक सत्य विपक्षियों को भी भली भांति ज्ञात है। एन डी ए सरकार ने इस नए बने खिचड़ी को बेकार करने में उनकी ही चूक को शस्त्र बना दिया और इंडिया की जगह "भारत" का प्रयोग राष्ट्रपति भवन से शुरू कर दिया। लाज़मी है कि इस बात पर देश विदेश में चर्चा होनी है और उसका फलित है कि इंडिया को भारत पर्यायवाची शब्द है यह दुनिया भर जाहिर हो रहा है। संविधान तथा कायदा दोनों जगह भारत शब्द को नकारने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। जी २० के जरिए दुनिया के सभी देशों को यह नया नाम वैकल्पिक होने का वास्तव ज्ञात हो जाएगा।
सारांश यह कि विरोधियों को चुनाव से पहले ही भाजपाइयों ने परास्त कर दिया है और अब उन्हें इंडिया के पक्षीय नामाभिधान पर जहां तहां जवाब देना होगा।
विरोधी पार्टियां अपना जनाधार पहले ही गंवा बैठी है, उपर से इस अंग्रेजीयत के घटाटोप ने उन्हें धराशाई कर दिया है।
कवि 'रवि'