प्रभु स्मरण
कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में सादर सप्रेम भेंट
चाहे कृष्ण कहो या राम
बनेंगे बिगड़े हुए सब काम
एक यशोदा का है प्यारा
एक मात कौशल्या का दुलारा
शक्ति साधना के है दोनों
परमादर्श किंतु निष्काम
चाहे कृष्ण कहो या राम
बनेंगे बिगड़े हुए सब काम
शत्रु दमन का ध्येय पुरस्सर
भक्त वत्सल है सदा निरंतर
जब जब आंधी पाप की आई
चले छोड निज धाम
चाहे कृष्ण कहो या राम
बनेंगे बिगड़े हुए सब काम
करें साधना आज समर्पित
दीन दयालु तुमको अर्पित
करें निछावर अपना सबकुछ
निज मुक्ति के लिए प्रणाम
चाहे कृष्ण कहो या राम
बनेंगे बिगड़े हुए सब काम
कवि 'रवि'

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