Monday, 23 December 2024

कमाल ए यार

कमाल ए यार आज कुछ इस क़दर हुआ 
ना चाहते हुए भी दिल में गदर हुआ 
वो मिला मुझे मयकदे की दहलीज पर 
क्यों शेख पर यारों इतना असर हुआ 
वो दोस्त है मेरा सारा जहां वाकिफ हैं 
गौरतलब ये बदलाव किस क़दर हुआ 
दूर से देखा किये उसको तसल्ली थी 
एक हमदर्द है जानकर जीना बसर हुआ 
या खुदा एहसास की इंतेहा आज हुई 
ये मंज़र मेरे ही नसीब क्योंकर हुआ 
मैं रिंद मैख्वार किससे कहूं चाहतों का सिला 
सोचा किया 'रवि' तो जीना दुश्वार हुआ 
कवि 'रवि' 

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home