Saturday, 28 December 2024

चंद ख्वाब एक हकीकत

मैं ख्वाब में सितारों की सैर नहीं करता 
किसी रुख्साना के दहलीज का दरख्त नहीं बनता 
अपने आगोश में सिमट रखें हैं ज़माने के ग़म 
कराहती है भी कभी किस्मत 
पर मैं उफ़ तक नहीं करता 
ऐ शोख अदाओं वाली तेरी उम्र भी क्या है 
एक पल के वास्ते भी तुझे 
पनाहगार नहीं मिलता 
मैं वो हूं जिसे तारीख ने गोद ले रखा है 
तुझे तारीफ के सिवा जमाने से कुछ नहीं मिलता 
कवि 'रवि'

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