चंद ख्वाब एक हकीकत
मैं ख्वाब में सितारों की सैर नहीं करता
किसी रुख्साना के दहलीज का दरख्त नहीं बनता
अपने आगोश में सिमट रखें हैं ज़माने के ग़म
कराहती है भी कभी किस्मत
पर मैं उफ़ तक नहीं करता
ऐ शोख अदाओं वाली तेरी उम्र भी क्या है
एक पल के वास्ते भी तुझे
पनाहगार नहीं मिलता
मैं वो हूं जिसे तारीख ने गोद ले रखा है
तुझे तारीफ के सिवा जमाने से कुछ नहीं मिलता
कवि 'रवि'

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