बहार आई है
फिज़ा रंगीन हो गई है
बारिश भी रुक सी गई है
आसमां में बदलियां
सुंदर नक्काशी में तब्दील हो रही है
हमारे पारंपरिक त्यौहारों की
शुरुआत हो रही है
फसलें अपने यौवन पर है
हमें यह नया वातावरण
नई सौगात दे रहा
आओ चलें अपनी संस्कृति को
सही मायनों में जियें
सुख-शांति तथा समृद्धि का
आस्वाद लें
सुखमय जीवन की कामना को
अपने परिश्रम से पूरा करें
कवि 'रवि'

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