Saturday, 20 September 2025

बहार आई है

फिज़ा रंगीन हो गई है 
बारिश भी रुक सी गई है 
आसमां में बदलियां 
सुंदर नक्काशी में तब्दील हो रही है 
हमारे पारंपरिक त्यौहारों की 
शुरुआत हो रही है 
फसलें अपने यौवन पर है 
हमें यह नया वातावरण 
नई सौगात दे रहा 
आओ चलें अपनी संस्कृति को 
सही मायनों में जियें 
सुख-शांति तथा समृद्धि का 
आस्वाद लें 
सुखमय जीवन की कामना को 
अपने परिश्रम से पूरा करें 
कवि 'रवि'

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