बस दुआ ही दवा है
कोई मर्ज ऐसा जो छूटता नहीं है
सिलसिला दवाओं का टूटता नहीं है
मेरा मरहला काम आता नहीं है
कोई मशविरा भी सुहाता नहीं है
मरे रोज़ कोई तो कैसी तसल्ली
मेरा राहबर संग आता नहीं है
हाकिम खुदाया परेशां परेशां
कोई टोटका काम आता नहीं है
नासाज़ दिल को न शिकवा किसी से
'रवि' चाह वो क्यों ही सुनता नहीं है
मिला भी हुनर गर फना हो सकूं मैं
ये दिल राहे जन्नत पे आता नहीं है
कवि 'रवि'

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