Saturday, 27 September 2025

बस दुआ ही दवा है

कोई मर्ज ऐसा जो छूटता नहीं है 
सिलसिला दवाओं का टूटता नहीं है 
मेरा मरहला काम आता नहीं है 
कोई मशविरा भी सुहाता नहीं है 
मरे रोज़ कोई तो कैसी तसल्ली 
मेरा राहबर संग आता नहीं है 
हाकिम खुदाया परेशां परेशां 
कोई टोटका काम आता नहीं है 
नासाज़ दिल को न शिकवा किसी से 
'रवि' चाह वो क्यों ही सुनता नहीं है 
मिला भी हुनर गर फना हो सकूं मैं 
ये दिल राहे जन्नत पे आता नहीं है 
कवि 'रवि'

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