Thursday, 10 June 2021

इरादा

बादल घिर आने दो
कड़कने दो बिजलियाँ
राहबर
तूफान से पा सुकून
लहरों को बना कश्ती
दरख्तों से कदम और आसमाँ सी बुलंदी
हर साँस में हो मस्ती
और इरादें चट्टान से
इन्तेहा है आना है तेरे करीब
बेख़ौफ ही आऊं तेरी चाहत भी तो है

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