ख़याल
मेरे गुलशन में गुलों का बसेरा नहीं
गुलाबों की खुशबू नहीं, भंवर का गुंजन नहीं
एहसास है पतझड़ का, पास है तन्हाई का
तेरी उल्फल नहीं तो क्या,
रुसवाई तो मेरे साथ हैं
तेरा दामन नहीं तो क्या
बेवफ़ाई तो मेरे साथ है,
तन्हां नहीं था मैं कभी
मेरी परछाई मेरे साथ थी
निकले हुये जनाजे के साथ
आज तन्हाई मेरे साथ है ।
कवि'रवि'

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