शायरी
वो ऐसे मुस्कराये के गुलों पे खुमॉंर आया मुडकर यूँ देखा के गिरते को सॅंवार आया पलभर जो ठिठक जाओ जरा
पाओगे मै जाँ निसार आया
सहरां के दिल पे बहार आयी है
वो आये तो पतझड पे फुहार छायी है
बादए लुत्फ का असर है यारों
मेरी रूह तोडके मज़हार आयी है
बाद बादा के अब रहता न असर कोई
साकी तेरे नजरोंकी सरजोशी कहाँ गई
एक जाम ही है
चुमों तो करार आता है
उनकी बेरुखी पे अब
मुझे प्यार आता है
कवि'रवि'

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