Tuesday, 8 June 2021

शायरी

वो ऐसे मुस्कराये के गुलों पे खुमॉंर आया मुडकर यूँ देखा के गिरते को सॅंवार आया पलभर जो ठिठक जाओ जरा 
पाओगे मै जाँ निसार आया

सहरां के दिल पे बहार आयी है 
वो आये तो पतझड पे फुहार छायी है 
बादए लुत्फ का असर है यारों 
मेरी रूह तोडके मज़हार आयी है

बाद बादा के अब रहता न असर कोई 
साकी तेरे नजरोंकी सरजोशी कहाँ गई

एक जाम ही है
चुमों तो करार आता है 
उनकी बेरुखी पे अब
मुझे प्यार आता है
कवि'रवि'

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