तीन एहसास
जिंदगी
एक चलना, हिलना, डोलना
और खत्म हो जाना
कुदरत की नेमत के मुताबिक
जज़्बात
एक ऐसी चीज जिसे
हरदम सम्हालनेकी कोशिश करना,
तलवे के ऊपर के घाव की तरह
और वह उतनेही टूटते चले जाना
प्याले से गिरते हुए एक एक बूंद की तरह
इश्क़
एक दाग़ जिसे हरदम छुपानेकी
कोशिश करना, कॅंवल में छुपे भँवर की तरह और उसका दुनियाको उतना ही एहसास होना
शामुरग के नाभी में बसी मुश्क की
खूशबू की तरह
कवि'रवि'

0 Comments:
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home