Monday, 14 June 2021

इश्क नासूर

खुले दरीचे से 
उसकी एक झलक ही नजर आई
खुदा गवाह है मेरी जान निकल गई पलके झपकाते हुये मिलाई जब उसने नजर  
जेहन के कफ़स से मेरी रूह निकल गई 
लोग कहते हे बंद दरीचों से भी सदा आती है उम्र बालीग हो तो 
दिल चुराने की अदा आती है 
जब उसके रुक्सार का होता है दीदार
प्यार के नग़मे लबों पे होते हैं सवार गुनगुनाता हुआ मैं फिरुं गली कूचों में 
उसके गेसूंओं की महक ले के हवा आती है मुहब्बत कर न ले 
मुझ जैसा नादान न बन 
टूट जाता है दिल जब भी
दुवा न दवा काम आती है।
कवि'रवि'

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