हसीना
लबों पर उभरते से वो लफ्ज़
एक कहानी सुना जातें हैं
तीखी नज़रों की कटारें
दीवाना बना जाती है
वो गेसूं रक्स करते हुए
चॉंद को ओझल कर जाते हैं
तेरे चेहरे पे न शिकऩ कोई
इधर जान पे बन आती हैं
कवि'रवि'
मेरे लबों पे को आरसी लफ्नो की मुझे एक कहानी सुना जाते हैं वो करे भाइयोंकी को तीखी कटारें नजरों की
दीवाना बना जाती है.
वो गूँसूं क्स करते हुये वो बोलू चाँद को ओझल कर जाते हैं तेरे वे चेहरे पे न शिकन कोई इधर जान पे बन कर हैं आती है

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