परछाई
मेरी परछाई मेरा साथ दे
ऐ तऩहाई मुझे हाथ दे
खामोश नज़ारों आवाज़ दो
डुबती मंज़िलों नया आगाज़ दो
नाकामी परवान चढ़ा दे
बदनामी बस नाम बड़ा दे
थमते दिल तू धडकन भर दे
बेजान जिस्म़ दे जान अगर दे
प्यार मोहब्बत गिले और शिकवे
जीने का सामान जो भरदे
मैं भी पल जी हूँ लेना चाहूँ
नज़रे अदा से ध्यान इधर दे
नज़रे अदा से ध्यान इधर दे
कवि 'रवि'

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