Sunday, 13 June 2021

साकी..... साकी

शाम जब ढल़ के रात होती है 
हमें तो रिदंगी याद आती है 
बड़ी दिलकश़ अदा है तुझमें साकी 
तेरे आते ही नशा आबाद होती है 
न जाने कैसा समाँ बंध जाता है 
सूकून चैनो अमन की बरसात होती है
तेरे नाम से साकी 
जुडा है हर एक मैकश 
जो शराबों में नही 
वो तुझमें बात होती है

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