Sunday, 13 June 2021

ख़ामोशी

अबके जब हम
वक्त की रफ्तार से निजात पाते है
अक्सर तेरे वे शिकवे गिले याद आते हैं
ता उम्र नहीं ला सके फुर्सत के दो पल, 
मज़हार में वो गुजरे ज़मानें याद आते हैं
हे ईश्वर
मुझे जन्नत न अदा कर 
उनके अरमानों के वो फसाने याद आते है
कवि'रवि'

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