ना फऱमानी
मौत
तेरे आने से चेहरे पे नूर आया है
तेरी आहट की सदा पाकर
जेहन में सुरूर आया है
तेरे साथ मेरे लिये
पै़गामे जन्नत जरूर आया है
मुझको मेरी हस्ती पर
इसलिये इतना गुरुर आया है
आ चल मुझे ले चल
तेरे आगोश मे छुपाये हुए
जन्नत भी देखें
आज मुझ जैसा कोई
मगरूर आया है
कवि'रवि'

0 Comments:
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home