मुहब्बत
बादलों की मुहब्बत है जमींसे
आसमां से नहीं
नदिया की मुहब्बत है सागर से
किनारों से नहीं
भँवरे की मुहब्बत है परागोंसे
पंखुड़ियों से नहीं
मेरी मुहब्बत है तेरी रूहसे
तेरे जिस्म़ तेरे रुक्सार से नहीं।
कवि'रवि'

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