कानून अव्यवस्था
न्याय देवता की आंखों पर पट्टी बांध कर उसे न्यायालय में यही कारण से रखा गया है कि वह न्यायालय में उपस्थित तो रहें लेकिन कुछ भी देखें नहीं। और, न्याय का व्यवसाय करने वाले खुलेआम न्याय देवता का चरित्र हनन कर सकें। न्याय देवता के हाथ में दिया गया पलडा भी एक तरफ झुका रहता है जो न्याय देवता देख नहीं सकती।
चलते चलते एक मूलभूत विषय पर प्रकाश डालना चाहूंगा कि इस देश में ऐसी कोई विशेष शिक्षा सुविधा आज तक भी नहीं है जो न्यायाधीश पद के लिए विद्यार्थी दशा में ही विशेषज्ञ पदवीधर तैयार कर सकें। सामान्य वकीलों को एक परिक्षा प्रक्रिया से जोड़ कर ( जिसमें काफ़ी तृटियां है, जहां से ही भ्रष्टाचार का उद्गम होता है) न्यायाधीश का चयन किया जाता है। न्यायालय एक ऐसी जगह बन गई है जहां ईश्वर को हाज़िर नाजिर मान कर झूठ का कारोबार धड़ल्ले से चलाया जाता है। देश में कुछ ऐसे खानदानी जज है जिनकी पीढ़ी दर पीढ़ी न्यायाधीश पैदा कर रही है और उच्चतम न्यायालय तक इनकी पैठ बनी रहती है।
"न्यू इंडिया" नये भारत का नारा देने वाली हमारी सरकार आइये देखें इस दकियानूसी कानून व्यवस्था को कब तक हम पर थोंपे रखती है।
भारत माता की जय
कवि'रवि'

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