Friday, 6 May 2022

असहाय चिड़िया

भीषण गर्मी के समय
दहलीज़ या खिड़की के 
पटपर आकर 
चीख चीखकर गुहार लगाती 
उस चिड़िया को
अनदेखा मत कीजिए
अपने बच्चों के प्रति उसकी शायद
कोई दरख्वास्त होगी
आपको देख देख वो कुछ
समझा रही होगी
अपने नन्हों की आह तक
बर्दाश्त न करने वाले हम में
उसे कहीं मानवता नज़र आती होगी
चले जाइए पलभर उस दिशा में
झांककर देखें कोई शत्रु तो नहीं
आ धमका है उसके घौंसले में
स्मरण रहे कि हमें भी
उनकी जरूरत है
स्वरों की भाषा में बद्ध
एक अनूठी कुदरत है
कवि'रवि'

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