नन्हा सा दिल
नन्हा सा दिल
और हसरतें हजार
यह करूं या वह करूं
खयालों की भरमार
एक एक पल है
दिल में हलचल
जेहन है बेजार
न शब ही सुहानी
न सहर में सुकून
पग में सिहरन
बारंबार
तन और मन का
मेल नहीं है
अजीब है कारोबार
'रवि' जहां में
कहीं नहीं है
इस विधी का उपचार
कवि'रवि'

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