आंदोलन एक समाधान
जलाओ जलाओ ये सडकों पे सबकुछ
दिखाओ के हम हैं तुमसे बहुत कुछ
चलो जेल जाते हैं नारा ये देकर
की ऐ राज्यकर्ता तू हम से सदा डर
उजाडो उजाडो ये बस्ती दुकानें
चलो खाक कर दो विरोधी मकानें
चलो लूट लो जो भी मिलता है लुटने
सुरक्षा के बाशिंद तो टेके है घुटने
वो अंग्रेज थे जिनकी गोली थी बोली
और वे रचाते थे लाशों की होली
अभी क्या है गद्दारी पर कुछ ना होता
तुम्हें ही जिलाये जो भी चुन के आता
मचाओ मचाओ अराजक सदा ही
नहीं लाज लज्जा बरतना कदा ही
मगर जानलो तुम हो चारा जहाॅं का
वतन के फरामोश तुम को मांदा कहां का
मगर याद रखना जो इतिहास में है
लुटेरें तुम्हें भी यूं लूटकर गये हैं
न तुम ही बचे तब न हम भी बचे हैं
जो आज हम है सभी परखचे हैं
अभी एक धागा है हम सब के हाथों
जागर करें जोड़कर अपने हाथों
नहीं झुकने देंगे कभी देश को हम
रखेंगे यूं इमान न टूटें कभी हम
रखेंगे यूं इमान न टूटें कभी हम
कवि'रवि'

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