Tuesday, 7 June 2022

हिंदु साम्राज्य दिन २०२२

हिंदु साम्राज्य दिन 2022 
ज्येष्ठ शुध्द त्रयोदशी दिनांक 12/06/2022
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम
वो एक दौर ऐसा था जब सारा भारत यवनों की या यूं कहिए कि मुसलमान दमनकारीयों की कुनितियों से और शैतानी कारनामों से त्राहिमाम त्राहिमाम कर रहा था। समृद्ध भारत को लूट का साधन समझ कर बेशर्मी से लूटा जा रहा था। उत्तर तथा दक्षिण भारत के तत्कालीन शासक कितने ही राजाओं ने मुगलों के समक्ष हार मान कर उनका अधिपत्य स्विकार कर लिया था।
ऐसे में पुणे प्रांत भी आदिलशाही का संभाग हुआ करता था और संयोग से यह शिवाजी महाराज के पिता श्रीमान शहाजीराजे भोंसले की जागीर थी। उल्लेखनीय होगा कि शहाजीराजे आदिलशाही में सरदार थे और दरबार में उनका वर्चस्व भी था। 
शौर्य और पराक्रम में अपराजेय होने के उपरांत भी क्या कारण था कि लगभग सभी हिन्दू राजाओं को मुसलमानी सत्ता से समझौता करना पड था? आज के परिप्रेक्ष्य में हम अभ्यास करें तो यह स्पष्टता से दिखता है कि संपन्नता के कारण सभी राजाओं में विलासिता और आत्मतुष्टि का प्रकोप जारी था, शौर्य और युद्ध कला केवल प्रदर्शन की वस्तु बनकर रह गई थी। प्रजा में आत्यंतिक निराशा छाई हुई थी और एक आक्रोश की स्थिति थी। ऐसे में पुणे में राजमाता जिजाऊ का चरित्र एक दृढनिश्चय के साथ आकार ले रहा था। शहाजीराजे भोंसले के ज्येष्ठ पुत्र संभाजी राजे दक्षिण प्रांत त्रावनकोर में अपनी माता के साथ पल बढ रहे थे और शिवबा इधर अपनी माता जिजाबाई से संस्कार प्राप्त कर रहे थे। शिवबा के बाल्यकाल में उन्हें जो शिक्षा मिलती गई उसमें से ही एक क्रांतिकारी युगपुरुष के चरित्र की मेढ़ रची गई। 
उनके किशोरावस्था का प्रताप है कि उन्होंने तोरणा किला काबिज़ कर लिया था और आदिलशाही दरबार से पूछे जाने पर दलील दी थी कि वे उसके रखरखाव को सुधारना चाहते हैं।
विश्व को 'गनीमी कावा', घात लगाकर हमला करना, आधुनिक शब्दमाला में जिसे रिबेल फाइट्स कहते हैं, उसकी आश्चर्यचकित करने वाली संकल्पना का इस घटनाक्रम से ही जन्म हुआ था। शिवाजी महाराज का छत्रपति शिवाजी महाराज बनने तक का प्रवास उस समय के सभी सत्ता केंद्रों के लिए एक अनाकलनीय तथा अप्रत्याशित सफलता थी। 
विश्व भर के तख्तों को हिला देने वाली लगभग सभी शक्तियां हो न हो छत्रपति शिवाजी महाराज के अपनाए हुए तरीकों का आजभी आदर्श मानकर प्रयोग करते हैं। 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिन को हिंदु साम्राज्य दिन के रूप में मनाता है। इसका मुख्य कारण है कि इस देश में तब से पहले कभी हिंदु साम्राज्य की परिकल्पना इतिहास में कहीं उल्लेखित नज़र नहीं आती, जबकि शिवाजी महाराज के प्रयासों का मूल हेतु 'हिंदवी स्वराज्य' रहा है। आधुनिक भारत की नींव इसी उद्देश्य से रखी गई है। शिवराज्याभिषेक की विधि से तभी के इतिहास को हिंदु साम्राज्य मिला और भारत वासियों को हिंदुत्व का नया परिमाण मिला, विचार मिला। 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना करते समय आद्य सरसंघचालक परम पूजनीय डॉक्टर हेडगेवार जी के प्रगल्भ वैचारिक क्षमता का प्रत्यय हमें इस बात से ही आता है कि उन्होंने संघ संविधान में भगवा ध्वज, भारत माता के उपरांत छत्रपति शिवाजी महाराज को सर्वोपरि माना है और स्वयंसेवकों को उनके आदर्श व्यक्तित्व का अध्ययन कर आचरण का आग्रह किया है। 
हिंदु साम्राज्य दिन के उपलक्ष्य में आयोजित इस संगोष्ठी में मेरे विचारों को व्यक्त करते समय कुछ त्रुटियां अवश्य रही है इसका मुझे एहसास है, परंतु आप सभी की सद्भावना से मुझे प्रेरणा मिलती रहेगी इस आशा के साथ मैं मेरा कथन समाप्त करता हूं। 
कवि'रवि'

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home