Thursday, 26 June 2025

वारी पंढरीची

आली आषाढीची वारी
वाट धरली पंढरी
डोक्यावर वृंदावन
मुखे विठ्ठल गजरी

देव विठोबा सावळा
गळा तुळशीच्या माळा
रंगे कीर्तनात सदा
माया भक्तांवर करी.....आली आषाढीची वारी

माय झाली रखुमाई
प्रेम सुख सर्वां देई
भक्त तारावया तीचा
पान्हा फुटे हो सत्वरी....आली आषाढीची वारी

'रवि' म्हणे मायबाप
माझे विठ्ठल रखुमाई
देती दर्शन मजलागी
सुटे इहलोकीची फेरी....आली आषाढीची वारी

कवि 'रवि' 

Saturday, 21 June 2025

ऐ जिन्दगी तेरी चाह में

ऐ जिन्दगी तेरी चाह में 
क्या क्या न हम करते रहे 
कल के जीने की खुशी में 
रोज ही मरते रहे 

एक लम्हा वो सुकूं का 
आज होगा रू ब रू 
इस तमन्ना के सहारे 
कल को दफ़नाते रहे 

वो दिये की लौ जो हर पल 
राहे मुकद्दर थी बनीं 
ख़ाक कजरी मानकर 
उसको बुझाते ही रहे 

क्या नहीं समझे 'रवि' 
के जिंदगी मंजिल नहीं 
फिर भी मैय्यत पे किसी के 
मर्सिये गाते रहे 

कवि 'रवि'