जुनून ए दुआ
दुआओं का जूनून इस क़दर हावी रहा
संगदिल ज़ख्म देते रहे मैं मुस्कुराता रहा
क्या अजब इंसाफ है खुदाई का
मेरे सदके पे उनको खौफ आता रहा
दुनिया से फारिग होकर चला भी जाऊं अगर
मेरे किरदार का चर्चा मेरे पीछे आता रहा
और अब न तरसा मेरे जिंदगी के मालिक
उम्मीद का हर लम्हा तुझसे भी दूर जाता रहा
'रवि' अक्स भी साथ छोड़ जाए तो क्या है
तेरा नाम सदियों को भाता रहा याद आता रहा
कवि 'रवि'

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