हौसला रख
वो बाग ही क्या जो गुलों का इस्तकबाल ना करें
वो शाख ही क्या जो फलों से लबालब ना भरें
वो दिल ही क्या जो जूस्तजू की ईजाद ना करें
वो शख्स ही क्या जो ख्यालों को हकीकत में तब्दील ना करें
वो कैसा ही कहलाएगा मौसम जो बहार ना धरें
वो लम्हा ही क्या जो मौके का इंतजार ना करें
नसीबों को लानत देने की कभी कोई जुर्रत ना करें
इरादों की खातिर जो मर मिटने की हिम्मत ना करें
कवि 'रवि'

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