राष्ट्र गीत
आओ प्यारे नन्हे मुन्नों
आओ बुढों और बुढ़ियों
अरे जवानो और मस्तानो
हम सब मिलकर देश बनायें
मिट्टी में होगी शुचिता
सह मानवता और नम्रता
दया क्षमा और शांति इनका
अटूट सा गुण मेलन होगा
पानी केवल पानी होगा
धरती केवल धरती होगी
एकही भाषा सब की होगी
सहजीवन की आशा होगी
देश हमारा होगा धर्म
देश की सेवा होगा कर्म
प्राण देश और साँस भी देश
"राष्ट्रीयता" यही परिवेश
एक के आंसू सबके होंगे
एक की खुशियां सब की होगी
शील हमारा होगी संपदा
बल देखें तो भागे विपदा
लुटे गये हम चाहें जितना
टूट चुके हम जितना टूटना
एक देश हों एक जीव सा
यही कामना यही कामना
भारत माता की जय
वंदे मातरम्
कवि'रवि'

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