Thursday, 10 June 2021

राष्ट्र गीत

आओ प्यारे नन्हे मुन्नों
आओ बुढों और बुढ़ियों 
अरे जवानो और मस्तानो
हम सब मिलकर देश बनायें 
मिट्टी में होगी शुचिता
सह मानवता और नम्रता 
दया क्षमा और शांति इनका
अटूट सा गुण मेलन होगा
पानी केवल पानी होगा 
धरती केवल धरती होगी
एकही भाषा सब की होगी 
सहजीवन की आशा होगी
देश हमारा होगा धर्म
देश की सेवा होगा कर्म
प्राण देश और साँस भी देश
"राष्ट्रीयता" यही परिवेश
एक के आंसू सबके होंगे
एक की खुशियां सब की होगी
शील हमारा होगी संपदा
बल देखें तो भागे विपदा
लुटे गये हम चाहें जितना
टूट चुके हम जितना टूटना
एक देश हों एक जीव सा
यही कामना यही कामना
भारत माता की जय
वंदे मातरम्
कवि'रवि'

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home