72 वहां प्रजासत्ताक दिन
श्वासों में बसी जो 'भारत माता'
स्वर्णमयी है 'भारत माता'.........१
लाखों के बलिदान हुए तब
शक्य हुआ हमें 'मुक्त चिंतन'......२
स्वतंत्रता के लिए 'हे माता'
करते रहेंगे 'रक्त सिंचन'............३
'मासूमों ने' कीया पराक्रम
रखी सदा जागृत ये 'ज्वाला'......४
भारत माता तुझे है 'अर्पण'
हम सबके 'प्राणों की माला'.......५
'एक एक युग का तू है दर्पण
संस्कृति तेरी 'धरा का भूषण'......६
'अजर अमर' है तेरी नदियां
'सदा हरित' है विंध्य हिमाचल.....७
'राष्ट्र गान' से ऊर्जा लेकर
'जन गण मन' हो पवित्र, प्रेमल....८
कवि 'रवि'

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