Tuesday, 17 May 2022

अरब-यहूदी तथा सनातनी भारतीय- भारतीय मुसलमान, एक तुलनात्मक विवेचन

इस विवेचन का प्रेरणास्रोत हैं मुंबई तरूण भारत में प्रकाशित श्रीमान मल्हार कृष्ण गोखले जी का एक लेख जो ज्यू और अरबों में बढते सौहार्द पर प्रकाश डालता है तथा विश्लेषण करता है। इस धरती पर कितनी सत्ताएं आयी और गयी इतिहास में कुछ अस्तित्व बना पाई और अन्य कई कालौघ में लुप्त हो गई। आज हम जिस विषय पर बात कर रहे हैं वो एक ऐसा विरोधाभासी विषय है, जिसकी कल्पना भी कोई राजनितिज्ञ नहीं कर पाया होगा।
हम सब वरीष्ठ नागरिक यह वास्तव अच्छी तरह जानते है कि बीसवीं सदी ने प्रचंड नरसंहार देखा है और इस नृशंसता का सबसे बड़ा शिकार बना यहूदी समुदाय जिसे आम तौर पर ज्यू के नाम से पुकारा जाता है। जातीयता एवं धार्मिक मान्यताओं में भेद के कारण उनको पश्चिमी देशों से तथा अरब देशों से भयंकर जघन्य प्रताड़नाओं के बाद इज़रायल की बेजान धरती पर बसने को बाध्य किया गया। विश्व भर में अपनी विद्वत्ता तथा कुशल उद्योजकता के कारण धनाढ्य इस वर्ग को वास्तव में कहीं अपना वतन, अपनी जमीन भी आधिकारिक तौर पर उपलब्ध नहीं थी। दुनिया से ठुकराए हुए ज्यू लोग अपार कष्ट सहकर किसी तरह इज़रायल में एकत्रित होने लगे और रणस्वरूप उस धरती को उन्होंने शनै शनै विकसित करना शुरू किया। १९४८से लेकर १९७२तक पड़ोसी अरबी देशों ने उनपर बार बार आक्रमण किए, किंतु अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे यहूदियों ने उन्हें ऐसा परास्त किया कि उसके बाद आजतक किसी अरब देश ने उन्हें ललकारने की हिम्मत नहीं दिखाई। शस्त्र तथा शास्त्र, अनुसंधान तथा विकास और आज की वैश्विक व्यवस्था में परीपूर्ण रूप से उभरा हुआ यह देश केवल ९० लाख लोगों की बस्ती है, जो हमारे देश के किसी एक बडे शहर की आबादी से भी कम है। परंतु प्रतिभा और संपन्नता में यह देश हमसे अप्रत्याशित रूप से आगे है। 
आज के परिप्रेक्ष्य में हम देख रहे हैं कि सौदी अरब तथा संयुक्त अरब अमीरात जो कि अरब जगत के अग्रणी है और अनुमानतः सभी मुस्लिम देशों पर प्रभुत्व स्थापित किए हुए हैं, इज़रायली प्रबुद्ध नागरिकों को बडी प्रसन्नता से उनके देश में बसने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। उन्हें बड़े बड़े ओहदे पर नौकरियां देने का लालच दे रहे हैं। इतना ही नहीं तो उन्हें अपने एक वंश होने का वास्ता दे रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में सौदी तथा यूएई और इज़रायल के बीच राजनयिक संबंध भी दृढ़ होने लगे हैं। क्या हम कल्पना कर सकते हैं कि एक दूसरे के कट्टर शत्रु ये दोनों समुदाय अपने विचारों को त्याग कर शांति और स्थिरता तथा विकास को महत्व देने लगे हैं? अकल्पनीय किंतु यह आज का सत्य है। 
आइये अब हम दूसरी तरफ भारतीय सनातनी हिन्दू समाज और भारतीय मुसलमानों के विषय में कुछ अध्ययन करते हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं भारत में विद्यमान समूचा मुस्लिम समुदाय पूर्वाश्रमी हिंदु ही है, जिनके पूर्वज मुस्लिम आक्रांताओं के अत्याचारों का शिकार बन कर धर्मांतरित हुए हैं। हम सरसरी नजर भी डालें तो हम देख पाएंगे कि पिछली सदी में चौथे दशक तक अधिकांश हिंदु इस वास्तव को समझ कर और उसी तरह मुसलमान भी इस वास्तव का स्वीकार कर अपनी अपनी धार्मिक मान्यताओं को सम्हाल कर सामुदायिक जीवन जीते थे। स्वतंत्रता के एवज में हमने अपने ही शरीर को दो हिस्सों में पाट दिया और इस धरती पर हिंदु मुसलमान विरोधी गुट तैयार होते गए। अंग्रेजों के नाम पर भले ही इसका ठिकरा फोड़ा जाता है परन्तु वास्तविकता यह है कि नेहरू और जिन्ना के दुराभिमान और गांधी जैसे  राजनीति का न्यूनतम ज्ञान रखने वाले लोगों की हवस की उपज बन कर रह गया है पाकिस्तान। एक तरफ घोरतम शत्रु यहूदी और अरब जान गये है कि नरसंहार से समस्या का समाधान नहीं हो सकता, अतः वे पुनः सब कुछ भुलाकर शांतिपूर्ण तरीके अपना रहे हैं, तो दूसरी तरफ अरबों के सिखाए हरी पगड़ी वाले तथाकथित तबलीगी जमात वाले यहां के मूलतः भारतीय मुसलमानों को दिनमें सपने दिखाकर क्रूरता को अपनाने की पराकाष्ठा कर रहे हैं। सदियों का सामुदायिक हिंसा से ग्रस्त और त्रस्त हिंदु भी अब प्रतिकार करने की भाषा बोलने लगा है और हाल के कितने ही वाकयात यह दिखा रहे हैं कि आने वाले समय में हिंदु अस्मिता एक प्रखर शक्ति बनकर दुनिया को गोचर होगी। मूलतः शांतिप्रिय हिंदु समाज और यहूदियों में मौलिक समानता है कि दोनों समुदाय प्रगति विकास और पृथ्वी पर उपलब्ध संसाधनों को मानवीय सरोकार से जोड़ते हैं। तो दूसरी तरफ कालबाह्य मान्यताओं को अंतिम मानकर अपनी प्रगति को नकारता हुआ मुस्लिम समुदाय पृथ्वी को भोग्य वस्तु मानकर अश्लाघ्य बर्ताव करता है।
समारोप करने से पहले मैं यही कहना चाहूंगा कि ऐसे अप्राकृतिक विचारधारा से मुकाबला करना है तो हमें भी यहूदियों की तरह अपना लोहा मनवाने का कठोर समय आया है, समय हमसे बल बुद्धि और धैर्य मांग रहा है। हमें भी हर संकट के पूर्वाभास को भांपकर अपनी तैयारियों पर जोर देना होगा।
विशेष निवेदन: वर्तमान समय में रशिया और उक्रेन इन दोनों देशों के बीच युद्ध चल रहा है। किंतु यह लक्षणीय है कि वहां तथा अन्य युरोपीय देशों में इस्कॉन के माध्यम से हिन्दू विचारधारा को अपनाने की भावना जनमन में बढती जा रही है। कुछ अफ्रीकी देश भी हिंदुत्व पर आग्रही होते जा रहे हैं। ऐसे दृश्य यह स्पष्ट करते हैं कि सनातन संस्कृति अविरल है, अविनाशी है और सर्वसमावेशी है।
जय श्री राम

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