एक रात की नज़र में
एक रात की नजर में
तन्हां ही सा सफ़र है
आगोश में है हसरतें
वीरानी का असर है
मैं काटता हूं लम्हें
एक और आस लेकर
मंजिल दगा न देगी
कुछ चाह में कसर है
राहे वफ़ा का आखिर
'रवि' अंजाम बेवफाई
इस दिल की दास्तां में
ख़ामोशी ही बसर है
कवि 'रवि'

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