Saturday, 29 April 2023

एक रात की नज़र में

एक रात की नजर में
तन्हां ही सा सफ़र है
आगोश में है हसरतें
वीरानी का असर है

मैं काटता हूं लम्हें
एक और आस लेकर
मंजिल दगा न देगी
कुछ चाह में कसर है

राहे वफ़ा का आखिर
'रवि' अंजाम बेवफाई
इस दिल की दास्तां में
ख़ामोशी ही बसर है

कवि 'रवि'

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